सिबिल स्कोर क्या होता है (Cibil Score Kya hota Hai) www.sharemarkethindi.com

सिबिल स्कोर क्या होता है (Cibil Score Kya hota Hai)

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सिबिल क्या होता है?

सिबिल एक आम भाषा में प्रचलित शब्द है, जो कि क्रेडिट ब्यूरो  कंपनी , ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड (TransUnion Cibil Limited) के शोर्ट फॉर्म को दर्शाता है,

वास्तव में, ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड (TransUnion Cibil Limited) भारत की पहली क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी है, जिसे शोर्ट में सिबिल (CIBIL) कहा जाता है,

इस तरह आम भाषा में बात की जाये तो,

सिबिल वास्तव में भारत में किसी व्यक्ति, संस्थाओं और कंपनी के क्रेडिट इन्फॉर्मेशन (उधार और कर्ज की जानकारी ) सुचना देने वाली कंपनी है,

सिबिल को क्रेडिट ब्यूरो (CREDIT BUREAU )  के नाम से भी जाना जाता है,

क्रेडिट ब्यूरो यानी  ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड (TransUnion Cibil Limited) को आरबीआई RBI (Reserve bank of India) द्वारा लाइसेंस प्राप्त है, और यह क्रेडिट इन्फोर्मेशन कंपनीज़ रेगुलेशन एक्ट ऑफ 2005 द्वारा REGULATE किया जाता है.

 

भारत की क्रेडिट ब्यूरो कंपनी

भारत में कुल चार कंपनी क्रेडिट ब्यूरो के तौर पे काम करती है, और सिबिल स्कोर प्रोवाइड करती है, जिसमे कुछ सबसे प्रमुख है –

  1. ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड (TransUnion Cibil Limited) – स्थापना सन 2000
  2. Equifax (इक्विफैक्स) – स्थापना सन  2010
  3. Experian (एक्स्पेरियन) – स्थापना सन 2006 (लाइसेंस मिला 2010 में )
  4. CRIF Highmark स्थापना सन  2010

इस तरह ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड भारत में क्रेडिट स्कोर देने वाली सबसे पुरानी कंपनी है, और यही कारण है कि आम लोगो में क्रेडिट स्कोर को सीधा सीधा सिबिल और सिबिल स्कोर के नाम से जाना जाता है,

सिबिल आज की अर्थव्यवस्था की बहुत बड़ी जरूरत है

हमारी अर्थव्यवस्था में उधार और कर्ज एक बहुत महत्वपूर्ण चीज है, उधार और कर्ज के बगैर आज के अर्थव्यवस्था की कल्पना भी नहीं की जा सकती है, ऐसे में कौन सा व्यक्ति कितना कर्ज ले रहा है, कर्ज को सही समय पर चूका रहा है , या नहीं,  इसकी सही जानकारी उधार देने वाले के पास होना बहुत ज्यादा इम्पोर्टेन्ट हो जाता है,

और ऐसे में आज बैंक अन्य वित्तीय संस्थाए जो LOAN (कर्ज) या उधार देती है, उनको इस कंपनी से किसी व्यक्ति या संस्था के क्रेडिट की पूरी जानकारी हासिल हो जाती है,

और इस तरह इस क्रेडिट ब्यूरो कंपनी सिबिल द्वारा दी जाने वाली जानकारी, कर्ज लेने वाले और कर्ज देने वाले दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है,

सिबिल (क्रेडिट ब्यूरो )कैसे काम करता है

सिबिल (CIBIL) या क्रेडिट ब्यूरो, सामान्य  व्यक्तियों और गैर-व्यक्तियों (संस्था और कंपनी ) के लोन (All type of Loan)  और क्रेडिट कार्डस (ALL CREDIT CARDS) से संबंधित भुगतानों (Payments ) के रेकार्डस्‌(Records) जुटाते और रखते हैं.

व्यक्तियों और गैर-व्यक्तियों (संस्था और कंपनी ) के ये Records और Payment History बैंको और अन्य लेंडर्स (उधार देने वाली संस्थाओ) द्वारा मासिक आधार (Monthly Base ) पर सिबिल या क्रेडिट ब्यूरो कंपनी के पास जमा किए जाते हैं.

और इस जानकारी का उपयोग करके क्रेडिट इन्फोर्मेशन रिपोर्ट (सीआईआर) तथा क्रेडिट स्कोर (CREDIT SCORE)  विकसित किया जाता है, जिनकी बदौलत लेंडर्स लोन आवेदनों का मूल्यांकन और स्वीकृत (Valuation and Approval ) करते हैं.

सिबिल स्कोर क्या होता है और कैसे काम करता है

( Credit bureaus Scoring System)

भारत की सभी क्रेडिट ब्यूरो कंपनी क्रेडिट स्कोर को 300 से लेकर 900 के बीच बताती है, यानी किसी व्यक्ति और संस्था का क्रेडिट स्कोर कम से कम 300 और अधिक से अधिक 900 तक हो सकता है,

और साथ ही सभी सिबिल कंपनी 700 से ऊपर क्रेडिट स्कोर को आदर्श क्रेडिट मानती है, और सभी लोगो चाहे कोई व्यक्ति हो या संस्था अगर उनका सिबिल स्कोर 700 से ऊपर है, तो ये उनके लिए एक अच्छे क्रेडिट स्कोर के तौर पर देखा जाता है,

आम तौर पर सिबिल स्कोर को इस तरह से बताया जाता है

 

CIBIL SCORE INFORMATION

CIBIL SCORE INFORMATION

  1. अगर सिबिल या क्रेडिट स्कोर 300 से 700 के बीच है तो सिर्फ 5% से 10 % तक ही चांस है कि उस व्यक्ति को कोई बैंक लोन दे,

ध्यान दीजिए कि जितना ज्यादा स्कोर उतना अच्छा होता है, जितना कम क्रेडिट स्कोर उतना ही बुरा स्थिति मानी जाती है,

 

  1. अगर सिबिल या क्रेडिट स्कोर 700 से 800 के बीच है तो 35% तक चांस है कि उस व्यक्ति को कोई बैंक लोन दे,

आम तौर पर 700 से ऊपर के सिबिल स्कोर को आदर्श सिबिल स्कोर माना जाता है,

  1. अगर सिबिल या क्रेडिट स्कोर 800 से 900 के बीच है तो 55% और उस से भी अधिक चांस है कि उस व्यक्ति को कोई बैंक लोन दे,

 ध्यान दीजिए कि – ऊधार देने वाली संस्था, उधार या कर्ज देने से पहले  सिर्फ क्रेडिट स्कोर नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ देखते है, जैसे आमदनी, आमदनी में स्थिरता, और अन्य पहलु,

इसलिए कभी आप ये न समझे कि सिर्फ सिबिल स्कोर अच्छा होने से ही आपको लोन मिल जायेगा,

 

लोन की मंजूरी (Loan Approval ) के लिए क्रेडिट स्कोर क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ध्यान दीजिए कि – सिबिल स्कोर लोन आवेदन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

आवेदक द्वारा आवेदन पत्र भरने और उसे कर्जदाता को सौंपने के बाद कर्जदाता पहले आवेदक के क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट की जॉंच करता है.

यदि क्रेडिट स्कोर कम है तो कर्जदाता शायद आगे आवेदन पर विचार भी न करे और उसी क्षण उसे अस्वीकृत कर दे.

यदि क्रेडिट स्कोर अधिक होता है तो कर्जदाता आवेदन पर विचार करता है तथा यह तय करने के लिए अन्य विवरणों पर विचार करता है कि आवेदन क्रेडिट के योग्य है या नहीं.

क्रेडिट स्कोर कर्जदाता के लिए पहले प्रभाव के रूप में कार्य करता है, स्कोर जितना अधिक होता है, लोन पर समीक्षा किए जाने और स्वीकृत होने की संभावनाएँ भी उतनी ही बेहतर होती है.

कर्ज देने का निर्णय केवल कर्जदाता पर निर्भर होता है और लोन/क्रेडिट कार्ड स्वीकृत हो या ना हो, इसपर सिबिल कोई फैसला नहीं करता.

अपना सिबिल क्रेडिट स्कोर कैसे पता करे ?

अपना सिबिल स्कोर पता करने के लिए आप ऊपर बताये गए चार सिबिल ब्यूरो कंपनी में किसी भी कंपनी की वेबसाइट पर जाकर, अपनी लाग इन आईडी बनाने के बनाने के बाद कुछ सिंपल स्टेप्स फॉलो करके सिबिल स्कोर पता कर सकते है,

सिबिल स्कोर के लिए आपको अपनी पर्सनल जानकारी , जैसे पैन कार्ड नंबर, जन्म तिथि, सही पता, नौकरी या बिज़नस की जानकारी और आपके द्वारा लिए कुछ लोन और क्रेडिट कार्ड के बारे में वेबसाइट पर जो जानकारी मांगी जो वो देनी होती है,

ध्यान दीजिए कि आप फ्री में भी क्रेडिट स्कोर संक्षेप रूप में चेक कर सकते है,

साथ ही, कम्पलीट डिटेल्स में क्रेडिट स्कोर के लिए आपको कुछ फीस भी पे करनी होती है,

सिबिल स्कोर पता करने के लिए वेबसाइट लिंक –

  1. ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड (TransUnion Cibil Limited) 
  2. Equifax (इक्विफैक्स)
  3. Experian (एक्स्पेरियन) 
  4. CRIF Highmark 

आप फ्री में बैंक बाजार की वेबसाइट से भी सिबिल स्कोर पता कर सकते है –

  1. BANK BAAZAAR

क्रेडिट स्कोर किस तरह से सुधारा जा सकता है ?

ध्यान दीजिए कि – आप अच्छा क्रेडिट इतिहास बरकरार रखना चाहते है या फिर अगर आप अपने ख़राब क्रेडिट स्कोर को सुधारना चाहते है तो आपको इन 6 सरल नियमों का पालन करना होगा :

  1. हमेशा अपनी देय राशि समय पर अदा करें. (TIMELY PAYMENT OF LOAN/EMI/DUEAMOUNT)

अगर आप कोई LOAN/EMI/DUE AMOUNT और क्रेडिट कार्ड बिल लेट यानी देय तिथि (DUE DATE) के बाद चुकाते है तो ये लोन देने वाली संस्थाओ द्वारा नकारात्मक रूप से देखा जाता है.

  1. अपने बैलेंस हमेशा कम रखें. (यानी आप अपने ऊपर कर्ज और उधार का बोझ कम से कम रखे)

अत्यधिक क्रेडिट का उपयोग करना हमेशा उचित नहीं होता, अपने इस उपयोग को नियंत्रित रखें.

  1. क्रेडिट का स्वस्थ मेल बरकरार रखें.
    Secured Loan जैसे – Home loan या Car Loan और Unsecured Loan जैसे – Personal Loan और Credit Card दोनो के बीच एक स्वस्थ मेल रखना बेहतर है.

अगर आप ज्यादा Unsecured लेते है तो इसे भी देनदारो द्वारा नेगेटिव तरीके से देखा जाता है,

  1. नए क्रेडिट का आवेदन मध्यम तरीके से करें.
    आपको बार बार क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई नहीं करनी चाहिए , यानी आप क्रेडिट को अत्यधिक आवश्यकता के रूप में नहीं दिखाएं,

हमेशा क्रेडिट कार्ड अप्लाई करते समय सावधान रहे,

  1. अपने सह हस्ताक्षरकर्ता, गारंटीशुदा और संयुक्त अकाउंट्स की निगरानी मासिक रूप से करें.

सह- हस्ताक्षरकर्ता, गारंटीशुदा या संयुक्त रूप से धारित खातों में हुए गलत भुगतानों के लिए आपको बराबर का जिम्मेदार माना जाता है. आपके सह धारक (या गारंटीड व्यक्ति) की लापरवाही आपके ज़रूरत के समय में क्रेडिट पाने के लिए आपकी क्षमता को प्रभावित कर सकती है

कभी भी कोई डॉक्यूमेंट पर हस्ताक्षर यानी Sign करते समय सावधान रहे, और सिर्फ उसी व्यक्ति के लिए Guarantor बने, जिस पर आपको पूरा भरोसा हो .

  1. पूरे वर्ष अपने क्रेडिट इतिहास की बार-बार समीक्षा करते रहें.

कही ऐसा न हो कि आपको सच में लोंन कि जरूरत हो और जब आप लोन अप्लाई करे तो लोन इस वजह से रिजेक्ट हो जाए,

इसलिए लोन आवेदन की रिजेक्ट होने जैसे दुर्भाग्यपूर्ण प्रसंगों को टालने के लिए समय-समय पर अपनी क्रेडिट स्कोर चेक करते रहे,

 

क्रेडिट स्कोर किस वजह से कम या ज्यादा होता हैं?

4 प्रमुख कारक आपके स्कोर को प्रभावित करते हैं.
     1. भुगतान का इतिहास

जैसे मैंने पहले कहा – विलंब से भुगतान करना (Late Payment )या आपकी ईएमआई में त्रुटि होना या बकाया रहना (हाल में या लगातार) दिखाता है कि अपनी मौजूदा क्रेडिट बाध्यताओं को अदा करने में आपको परेशानी हो रही है और यह आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है.

  1. क्रेडिट सीमा का अधिक उपयोग.

अपने क्रेडिट कार्ड पर बढ़ा हुआ खर्च ज़रूरी नहीं है कि आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, वहीं दूसरी ओर आपके क्रेडिट कार्ड के मौजूदा बैलेंस में बढ़ोतरी होना चुकता करने के बढ़े हुए भार का संकेत करता है और आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है.

  1. क्रेडिट कार्डस या व्यक्तिगत (पसर्नल) लोन्स का उच्चतर प्रतिशत (जिसे असंरक्षित लोन के रूप में भी जाना जाता है)
    संरक्षित लोन्स (जैसे ऑटो, होम लोन, और असंरक्षित लोन (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, के बीच संतुलन रखने से आपके स्कोर पर अधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना होती है.
  2. हाल ही में कई नए खाते खोलना.

यदि आपको हाल ही में विविध लोन्स और क्रेडिटस कार्डस की स्वीकृति मिली है तो देनदार आपके आवेदन को सावधानी से देखेंगे क्योंकि यह आचरण संकेत करता है कि आपके ऋण का भार बढ़ चुका है, जो आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा.

क्या सिबिल रिकार्डस को मिटाया या बदला जा सकता हैं?

सिबिल रिकार्डस को मिटा या बदल नहीं सकती जो आपके सीआईआर को अपने आप प्रतिबिंबित करती हैं, या कंपनी  केवल अपने सदस्यों (बैंकों और वित्तीय संस्थानों) द्वारा प्रदान किए गए व्यक्तियों के रिकार्डस जुटाते हैं. इसमें ‘अच्छी’ और ‘बुरी’ क्रेडिट या दोषी व्यक्तियों की सूची भी नहीं होती.

जब सिबिल स्कोर ‘NA’ या ‘NH’ हो तो उसका क्या अर्थ होता है?

NA का अर्थ है NOT APPLICABLE (लागू नहीं)  और NH का अर्थ है (NO HISTORY)

ध्यान दीजिए कि सिबिल स्कोर का NA और NH  स्कोर होना बिलकुल बुरी बात नहीं है. इसका अर्थ निम्नलिखित में से एक होता हैं :

  • आपको कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है या स्कोर करने के लिए आपका क्रेडिट इतिहास पर्याप्त नहीं हैं, यानी आप क्रेडिट सिस्टम में नए हैं
  • पिछले दो वर्षों में आपने कोई क्रेडिट गतिविधि नहीं की है.
  • आपके पास सभी ऐड-ऑन क्रेडिट कार्डस हैं और आप क्रेडिट के लिए उन्मुख नहीं हुए है.

ध्यान दीजिए कि –  NA या NH SCORE को को कर्जदाता द्वारा नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाता, लेकिन कुछ कर्जदाताओं को क्रेडिट नीति “NA” या “NH” स्कोर वाले आवेदक को कर्ज देने से रोकती है, क्योकि वो ऐसा मानती है कि क्योकि कर्ज लेने वाले व्यक्ति के बारे में उस इस बात कि पर्याप्त जानकारी नहीं है कि वह लोन सही समय पर चुकाता है या नहीं?

और इस तरह आगे भी सही समय पर लोन चुकाएगा या नहीं ?

इसलिए NA या NH वाले लोगो को ये सलाह दी जाती है, कि वह पहले छोटे लोन जैसे – क्रेडिट कार्ड, या फिर बाइक लोन के लिए अप्लाई करे और उस लोन को समय पर चुकाए और उसके बाद किसी बड़े लोन जैसे होम लोन के लिए अप्लाई करे,


आशा है आपको इस पोस्ट से क्रेडिट स्कोर और सिबिल के बारे में काफी सारी जानकारी मिल गई होगी, अगर आपके मन में सिबिल या क्रेडिट स्कोर से जुड़ा कोइ सवाल है तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते है,

पोस्ट पूरा पढने के लिए आपका धन्यवाद

One Response

  1. shushila devi October 16, 2018

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