RAT RACE

RAT RACE -MUST AND WORTH READING STORY

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Contents - कंटेंट्स

RAT RACE की कहानी

3 इडियट मूवी का एक डायलॉग है –

“लाइफ एक रेस है, तेज नहीं भागोगे तो लोग तुम्हें कुचल कर आगे निकल जाएंगे “

आज हम में से ज्यादातर लोग LIFE के इस  SO CALLED “RAT RACE” में आगे भागने की कोशिश तो कर रहे हैं,

लेकिन अधिकतर लोग इस रेस में फसे  रह जाते हैं और कभी आगे नहीं निकल पाते ,

दोस्तों, रिच डैड पुअर डैड के लेखक,

रॉबर्ट कियोसाकी ने , LIFE के  इस रेस को नाम दिया है “THE RAT RACE”

हिंदी में कहे तो  “चूहा दौड़”

आइए अब देखते हैं कि,

कैसे हम SAB  लाइफ के RAT RACE में KAISE फंस जाते हैं ?,

अगर आप किसी भी मिडिल क्लास आदमी की जिंदगी को,

ध्यान से देखें जो कि ठीक ठाक EDUCATED PERSON होता है, और LIFE में कड़ी मेहनत भी करता है,

तो आपको सभी मिडिल क्लास लोगों की जिंदगी की एक सच्चाई दिखेगी ,

जो बिलकुल एक जैसा होता है,ज्यादातर लोग  एक जैसी RAT RACE में फसे हुए  हैं,

अब ये RAT RACE होता क्या है,

आइए देखते हैं ,

RAT RACE को समझने के लिए आइये , हम अपनी LIFE को शुरू से दखते है ,

बच्चा पैदा होता हैं, स्कूल जाता है

और मां बाप अपने बच्चे को सिखाते हैं कि बेटा अच्छे मार्क्स लाओ

ताकि एक दिन तुम्हे अच्छी नौकरी मिले और तुम सफल हो जाओ,

फिर माता-पिता को ये देख कर खुशी होती है कि

बच्चे को स्कूल में अच्छे मार्क्स मिल रहे हैं,

और उन्हें लगता है कि -बच्चा एक दिन कुछ न कुछ जरुर अच्छा करेगा,

और फिर बच्चा एक दिन कॉलेज में चला जाता है

और फाइनली बच्चे को  कॉलेज से अपनी डिग्री मिल जाती  है,

जो उसे उम्र के २२ साल तक  बहुत सारे RACE में जीत कर हासिल होता HAI,

बच्चे को लगता है कि  उसने DEGREE पाने कि RACE को जीत लिया, और अब उसे डिग्री मिल गयी है , और अब  इस तरह उसकी LIFE SET हो जाएगी ,

और  फिर बच्चे की बचपन से जैसी प्रोग्रामिंग की गई है, उसके अनुसार बच्चा एक बहुत SAFE, सिक्योर और अच्छी सैलरी वाला जॉब तलाश करता है

और फिर थोड़ी परेशानी के बाद  1 दिन उसे उसे किसी एक बहुत बड़ी MNC कंपनी में या फिर GOVERNMENT जॉब मिल जाता है,

बच्चा अब पैसे कमाने लगता है, फिर बच्चे के पास बहुत सारे  क्रेडिट कार्ड OFFERS आने लगते हैं,

क्योंकि बच्चा अब कमा रहा रहा है,

और उसके पास पैसे आ रहे हैं,

तो वह जमकर शॉपिंग करना  शुरू करता है ,

नए बाइक, कार, मोबाइल्स, गैजेट्स, महंगे कपडे, शूज और बहुत कुछ खरीदता है,

फिर बच्चा अपनी सोसाइटी मेंटेन करने के लिए दोस्तों के साथ पार्टी करता है,

घूमने जाता है,

और गर्लफ्रेंड के साथ TIME बिताता है,

और डेटिंग पर खर्च करता है,

फिर कुछ साल साल में उसकी शादी हो जाती है

शादी के बाद जिंदगी उसे अब और  मजेदार लगती  है,

क्योंकि आजकल हस्बैंड और वाइफ दोनों भी जॉब करते हैं

और दोनों YE SOCH KE BAHUT खुश होते हैं कि उनके पास पास 2  सैलरी होगी,

और इस तरह उनकी लाइफ सेट हो जाएगी ,

वे खूब सारी शॉपिंग करते हैं, TV, घर, गाड़ी, और घर का FURNITURE, साथ साथ बहुत कुछ खरीदते हैं,

फिर वह कपल फैमिली प्लानिंग करता है,

और अब उनका एक बच्चा हो जाता है

बच्चे के साथ उनके खर्चे बढ़ जाते हैं, इसलिए कपल को लगता है कि उन्हें अपने बच्चों के लिए, पहले से ज्यादा रिस्पॉन्सिबल बन जाना चाहिए,

इस तरह उनका कैरियर अब पहले से ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है

अब वे लोग जॉब CHANGE करना या कुछ और नया BUSINESS शुरू  करने के बार में नहीं सोचते,

“यही कारण है कि हमारे यहाँ MARRIED LOGO को नौकरी में PRIORITY दी जाती है”

अब वे लोग जो जॉब कर रहे होते है, उस जॉब में पहले से ज्यादा कड़ी मेहनत से अपना काम करते हैं, ताकि उनका BOSS खुश रहे, और उनको सैलरी इंक्रीमेंट तथा प्रमोशन मिले,

उन्हें प्रमोशन और इंक्रीमेंट भी मिल जाता है ,

और इसी बीच उनको दूसरा बच्चा भी हो जाता है,

अब दूसरे बच्चे के के साथ अब उन्हें उन्हें बड़े घर की जरूरत महसूस होती है ,

वह अपनी जॉब में पहले से ज्यादा मेहनत करते हैं,

और  दूसरा जॉब भी करने लगते हैं

उनकी KADI मेहनत SE UNKI सैलरी तथा इनकम भी बढ़ जाती है,

फिर वह बड़ा घर ले लेते हैं

लेकिन बढ़ती इनकम के साथ -साथ उनके ऊपर टैक्स लायबिलिटी, होम लोन, पर्सनल लोन, मेंटेनेंस खर्च और बिल्स के पेमेंट करने के बाद,

उनको बड़ी हैरानी होती है कि , बढे हुए SALARY INCOME के बावजूद , उनके हाथ में बहुत थोडा सा अमाउंट बचता है, और वो आर्थिक तंगी में ही रहते है,

इस बीच उनको अपने फ्यूचर को सिक्योर करने की भी चिंता सताती है, और इस लिए बचे हुए अमाउंट से वे लोग कुछ म्यूचुअल फंड भी खरीद लेते हैं

और अपना राशन तथा ट्रेवलिंग का खर्चा क्रेडिट कार्ड से पूरा करते हैं,

अब उनके बच्चे, जैसे- जैसे बड़े होते हैं,

कपल्स को अपने बच्चों की कॉलेज फीस और अपनी रिटायरमेंट की चिंता सताने लगती है ,

और फिर इस तरह 35 से 40 की उम्र तक आते आते,

यह कपल्स अपने लोन इंस्टॉलमेंट, AUR रेगुलर खर्चो तथा बच्चों की फ्यूचर के लिए, काम में इस तरह उलझ जाते हैं, कि उन्हें पता भी नहीं चलता कि वो एक RAT RACE में फस चुके होते है,

और इस RAT RACE में वे ये भी भूल जाते है, कि इस RAT RACE के बाहर भी कोई जिंदगी है,

एक बार RAT RACE में फंसने के बाद,

आदमी बाकी की जिंदगी,

इसी तरह,

अपने मालिक के लिए,

सरकार को टैक्स देने के लिए लिए

तथा अपने लोंस AUR EMI तथा TAMAM TARAH KE बिल के पेमेंट के लिए कड़ी मेहनत करता रहता है,

और वापस एक दिन APNE BADE HOTE  बच्चों को यही सलाह देता है की “अच्छे मार्क्स लाओ जिससे तुम्हारा फ्यूचर सिक्योर और सफल होगा”

यह RAT RACE नहीं तो और क्या है,

की KHUD RAT RACE ME में फंसे होने के बावजूद,

जाने अनजाने में अपने बच्चे को वही सलाह दे रहा है,

कि वह भी बड़े होकर, इसी RAT RACE में में फंस जाएं,

DOSTO, समय रहते अगर हम इस RAT RACE को समझ ले, तो इस RAT RACE से बाहर निकलकर हम अपनी लाइफ को बेहतर ढंग से जी सकते है,

दोस्तों याद रखे कि -RAT RACE से बाहर निकलने के लिए हमें फाइनेंसियल एजुकेशन यानी एकाउंट्स और और इन्वेस्टमेंट को COMPULSARY सीखना पड़ता है,

लेकिन मजे की बात यह है कि एकाउंट्स AUR INVESTMENT KO  सबसे बोरिंग सब्जेक्ट माना जाता है,

और SUBJECT BORING HONE KE KARAN HAM जिंदगी की सबसे जरूरी चीज को नहीं सीखते हैं,

जो हमें इस लगातार REPEAT होने वाले RAT RACE से बाहर निकाल सकता है,

अगर मेरी तरह आपको भी इस RAT RACE वाली बात में दम लगता है,

और आप नहीं चाहते कि, आप भी किसी तरह के RAT RACE में फ़स जाये,

और वो कभी न कर पाए जो करना चाहते है,

तो आपको  अकाउंट और इन्वेस्टमेंट, जरूर सीखना चाहिए,

जिस से कि हम इस RAT RACE का हिस्सा न बने और अपनी जिंदगी को FINANCIALLY FREE होकर  जी सके,



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