अंश पूंजी क्या है

अंश पूंजी क्या है ? और अंश पूंजी के प्रकार (Share Capital)

अंश पूंजी क्या है?

आज के इस पोस्ट में आप जानेंगे कि – अंश पूंजी क्या है? और इसका वास्तव में क्या मतलब है?

अगर आप ध्यान से देखे तो अंशपूंजी दो शब्दों को साथ में मिलकर बना शब्द है – जिसमे पहला शब्द है अंश जिसे अंग्रेजी में Share कहते है और दूसरा शब्द है पूंजी जिसमे अंग्रेजी में Capital कहा जाता है,

तो इस तरह अंशपूंजी यानी Share Capital को समझने के लिए सबसे पहले आपके लिए इन दोनों शब्दों के अलग अलग मतलब को समझना जरुरी होता है ताकि आप बेहतर तरीके से समझ सके कि अंश पूंजी क्या है? और इसका वास्तव में अंश पूंजी का क्या मतलब है?

तो आइए पहले पूंजी को समझते है –

पूंजी (Capital)

पूंजी यानी Capital (कैपिटल) किसी बिज़नस की शुरुआत करने के लिए बिज़नस के मालिक द्वारा लगाया गए धन और सम्पति का मूल्य होता है, जैसे – रमेश ने अपने बिज़नस की शुरुआत करने के लिए 1 लाख रूपये नकद और 30 हजार रूपये का फर्नीचर और अन्य सामान लगाया, तो इस तरह रमेश के बिज़नस में रमेश की पूंजी का मूल्य होगा –

रमेश की पूंजी = 1,00,000 (नकद) + 30,000 ( फर्नीचर और अन्य सामान) = 1,30,000 रूपये,

आइए अब अंश को समझते है,

अंश (share)

अंश यानि share, पूंजी के एक निश्चित भाग को कहा जाता है, जैसे – अगर पिछले example में रमेश की कुल पूंजी है – 1,30,000 रूपये, अब अगर रमेश की पूंजी को अगर अलग अलग कुल 13 हजार हिस्सों में बाट दिया जाये,

रमेश की कुल पूंजी = 1,30,000 रूपये/13 हजार शेयर = 13 रूपये एक शेयर

इस तरह रमेश की पूंजी को अलग अलग 13 हजार हिस्सों में बाटने से रमेश की पूंजी के 13 हजार अंश यानि शेयर हो जायेंगे, और प्रत्येक अंश यानि शेयर की कीमत होगी = 10 रूपये,

(अब पूंजी को बाटने का क्या मतलब है और ये क्यों जरुरी है, इसके बारे में बाद में बात करेंगे)

 आइये, अब बात करते है अंशपूंजी क्या है? और साथ ही ये भी समझेंगे कि कंपनी की पूंजी को बाटने क्यों जरुरी हो जाता है,

अंश पूंजी (Share capital)

Company एक कृत्रिम (Artificial) व्यक्ति होता है, जिसका कानून में बिज़नस के मालिक से अलग अस्तितत्व होता है, जैसे – पिछले example में रमेश ने बिज़नस में पूंजी लगाई, रमेश बिज़नस के मालिक कहे जायेंगे, लेकिन रमेश ने अपने बिज़नस का नाम दिया – देशी मसाला, तो अब अब “देशी मसाला” कानून की नजर में एक व्यक्ति की तरह हो गया, और इस तरह देशी मसाला और रमेश दो अलग अलग लोग हो गए…

अब जब कंपनी छोटी होती है, जैसे एकल स्वामित्व (Proprietorship)  या साझेदारी (Partnership) तो कंपनी के वित्तीय पुस्तकों में एक व्यक्ति या कुछ व्यक्ति के नाम तो दिखाए जा सकते है,

लेकिन, जब कंपनी बड़ी हो जाती है-  जैसे – प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या लिमिटेड कंपनी, जिसमे बहुत सारे लोगो का पैसा कंपनी के पास पूंजी के रूप में आता है,

तो इस तरह कंपनी के एक कृत्रिम व्यक्ति होने वे कारण, कंपनी खुद तो पूंजी ला नहीं सकती, या खुद पूँजी को उत्पन्न नहीं कर सकती,

और बिना पूंजी के कंपनी बन नहीं नहीं सकती तो इसलिए जो आवश्यक रूप से अलग अलग जितने भी व्यक्तियों से पूंजी के रूप में पैसे एकत्रित की जाती है, उन सभी को कंपनी की पूंजी का अंशधारी कहा जाता है, और इन सभी अंशधारियो से एकत्रित राशि को कंपनी का अंशपूँजी कहा जाता है।

(अब आप ये भी समझ गये होंगे कि – कंपनी के पूंजी को अंश के रूप में क्यों बाटा जाता है, ऐसा इसलिए क्योकि कंपनी के रूप लोगो अपनी हिस्सेदारी को इस अंश के माध्यम से ही दावा कर सकते है,

जैसे – अगर रमेश अपनी कंपनी “देशी मसाला” के कामकाज को बढाने के लिए, अपनी कंपनी को प्राइवेट लिमिटेड या  फिर लिमिटेड कंपनी बनाना चाहते है तो ऐसे में जब रमेश की कंपनी की पूंजी में अगर पहले से 13 हजार शेयर है, तो प्रत्येक शेयर का मूल्य 10 रूपये है – तो अगर दस लोग (प्रत्येक व्यक्ति 3900 रूपये) रमेश की कंपनी में पूजी के रूप में पैसा देते है ,

तो इस तरह उन दस व्यक्ति के पास जो शेयर होंगे वो होगा = 390 शेयर

=3900 (प्रत्येक के द्वारा दी गई पूंजी राशी)/10 प्रति शेयर मूल्य = 390 शेयर

और इस तरह अगर इसे प्रतिशत के रूप में देखा जाये तो प्रयेक व्यक्ति के पास 390*100/13000 = 3%

यानि सभी दस लोग अब रमेश की कंपनी “देशी मसाला” में 3 -3 प्रतिशत के हिस्से के मालिक हो गए है,

तो इस तरह से अब सभी लोगो (रमेश की पूंजी को मिलाकर ) की पूंजी को एक साथ कंपनी की अंश पूंजी कही जाएगी……और कंपनी के लेखापुस्तकों (Accounting books) में अंश पूंजी कहा जायेगा….

अब अगर आप देखेंगे तो अंश पूंजी के कई अलग अलग प्रकार होते है, आइए इसे भी समझते है –

अंश पूंजी के प्रकार (Type of Share Capital)

  1. अधिकृत अंश पूंजी (Authorized Share Capital) – कंपनी के सीमा पार्षद नियम के पूंजी वाक्य में लिखी अधिकृत अंश पूंजी को उस कंपनी की अधिकृत पूंजी कहते है एक कंपनी अपने जीवन काल में इससे अधिक पूंजी जारी नही कर सकती है इसे कंपनी की नाममात्र पूंजी तथा पंजीकृत पूंजी भी कहते है
  2. निर्गमित अंश पूंजी (Issued Share Capital)अधिकृत अंश पूंजी का वह भाग जिसका निर्गमन जनता में किया गया है उसे निर्गमित अंश पूंजी कहते है
  3. प्रार्थित अंश पूंजी (Subscribed Share Capital) – निर्गमित अंश पूंजी का वह भाग जिसे जनता द्धारा  क्रय कर लिया गया है उसे प्रार्थित अंश पूंजी कहते है
  4. याचित अंश पूंजी ( Called up Capital) – प्रार्थित अंश पूंजी का वह भाग जो कंपनी द्वारा जनता से माँगा जा चूका है उसे याचित अंश पूंजी कहते है
  5. प्रदत्त अंश पूंजी (Paid up Share Capital) -याचित अंश पूंजी का वह भाग जिसका भुगतान जनता ने कर लिया है उसे प्रदत्त पूंजी अंश कहते है
  6. संचित अंश पूंजी (Reserved Share Capital) – प्रार्थित अंश पूंजी का वह भाग जो कंपनी के समापन पर माँगा जायेगा उसे संचित अंश पूंजी कहते है

तो मै आशा करता हु कि आप इस पोस्ट को पढ़कर समझ पाए होंगे कि अंश पूंजी क्या है? और इसका वास्तव में क्या मतलब होता  है?

अगर आपके मन में इस पोस्ट के बारे में कुछ विचार या सुझाव हो तो  नीचे कमेंट करके जरुर बताये

पोस्ट पूरा पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद…

 

Comment on This Post

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.